31 दिसम्बर 2009

प्रार्थना .............



ये छोटी सी बच्ची नव वर्षकी पूर्व संध्यामें कुछ प्रार्थना कर रही है ...मेरे प्यारे अजीज पाठकोंको आज मेरा नम्र निवेदन है की ये छोटी सी बच्ची की क्या प्रार्थना हो सकती है उसके शब्द आज आप मुझे सुझायेंगे .......
बस इस उम्र के अनुरूप होनी चाहिए उसकी प्रार्थना भी ......
आप मेरा साथ देंगे ना ?????????????????????????????????

30 दिसम्बर 2009

नए वर्षका इंतज़ार है .....

आज मैं बहुत ही मशरूफ हूँ ....
अपने आँगनमें एक बड़ा सा गढ्ढा खोद रही हूँ ...
आज घर साफ़ कर दिया ...
आज फिर दीवाली मना रही हूँ ....
वो सारी बुरी यादें और घावो को इस गढ्ढेमें दफ़न करने है .....
उस पर नीमका पौधा लगाना है ...
जितना भी जहर गाढ़ दिया है उसे ये चूस लेगा ...
बड़ा होगा तो ठंडी छाँव के साथ औषधि भी देगा .....
अच्छे पलों को नए फ्रेममें लगवा दिया है ...
और उसे दीवारों पर सजा दिया है ....
चलो अब नए साल की तैयारी करनी है ,
कुछ रोशनी करनी है उन बच्चोंके चेहरे पर भी ,
जो फुटपाथ पर आसमांकी चादर ओढ़े सो जाते है ,
मिलना है उन बुजुर्गोसे जिन्हें आजादी के दीवाने
उनके खुदके बच्चे वृध्धाश्रममें तनहा छोड़ जाते है ......

29 दिसम्बर 2009

एक जश्न एक जाम ...

एक लम्हे को गिलासमें डाल और पीले ,

जिंदगी है बस यही पल में इसी को जी ले ,

कल ये कर ना पाए ये अफ़सोस न हो ,

जिंदगीके हर क़र्ज़ आज ही उतार ले .....

गममें साथ रहे जो हरदम उसकी खोज बिन कर ले ,

मिल न पाए कुछ नहीं एक पाती लिख दे या फोन तो कर ले ....

कलकी जिंदगी पर रोता है क्यों ?

जो देखा नहीं आया नहीं उस पर इतना सोचता है क्यों ?

कल की गलती आज सुधार ले और आने वाले कल को

आज ,अभी और इसी वक्त सुधार ले ......

दिल दुखाया हो जिसका भी मुआफी मांग ले ,

अपनी मुस्कराहट औरोंमें बाँट दे ...

जिंदगी है एक जाम इस में हो नशा या जहर या अमृत !!!

बस इसे तू पी ले और इस पलमें तो तू जी ले ....

28 दिसम्बर 2009

आज भी तलाश है ....

मेरे कुछ सपने जो अधूरे ही रहेंगे इस साल भी ,

तभी तो मैं ताकता हूँ अभी भी हर साल नए साल की राह .....

अरमान मेरे ये वाहनों के भीड़ वाले इस शहर में

बड़ी सुबह साइकिल लेकर निकल पडूँ

वो गली गलियारे में जाकर हर दोस्तसे मिल आऊं .......

वो भी मेरे साथ ही निकल पड़ेंगे डबल सिट बैठ कर ,

यादगार रहेगा ये दिन और हम कुहराम मचाएंगे ,

जिस गुरु को बहुत सताया सालों तक ,

उसे एक अच्छा सा तोहफा देकर आ जाऊं .....

फ़िर वो ठेले पर जाकर बेर ,कच्ची आम खायेंगे ,

थोड़ी पानी पुरी और थोड़ी आलू टिक्की खायेंगे .....

ये सारी बदमाशियां करते वक्त एक भूल जानबूझके कर जायेंगे ....

उस दिन हम अपना मोबाइल घर पर ही भूल जायेंगे ...........

27 दिसम्बर 2009

लोरी .....




कल रात नींद न आई देर तक ,

सिरहाने पर तकिये पर सर रख एक सैर को चल दिए ...

दूर कहीं दूर मेरा ही अक्स था जो मुझे अंगुली थाम ले गया ....

एक चूं चूं करता जूता पहन कर हम इठलाते थे ,

वो शर्माजी के आम की अम्बिया चोरी कर भाग जाते थे ,

वो नदी की रेत के तट पर मिली सीपीयां हमने एक डिबिया में छुपायी थी ,

वो टूटी हुई कान की बाली गुडियाको पहनाई थी ,

लल्ली के गुड्डेसे उसकी शादीमें खूब धूम मचाई थी ,

हमारे शोर गुल से तंग पिताजीने गुस्सेमें हमें एक थप्पड़ लगायी थी ,

रो रो कर सुझा दी थी आँखे और पिताजीको दया आ गई थी ,

उस दिन उन्होंने हमको गोदमें ले जाकर आइस क्रीम खिलाई थी ....

गिर जाते थे जब साइकिलसे हम तो रुमालसे घाव छुपाये थे ,

दुसरे दिन दौड़में भी हम पहला नंबर लाये थे ....

कुछ भी वो अनुभव था नया सा ,अच्छा लगा हमें यूँ ही घूमना ,

गोदमें हमारी दादीने सुलाकर हमें लोरी भी सुनाई थी ,

वो लोरी को याद कर हमें फ़िर आज नींद आ गई थी ...


कल रात नींद ना आई देर तक तब दादी ने लोरी गाई थी .....


26 दिसम्बर 2009

धन्यवाद .......

चलो नए साल को हँसते हँसते बिदा करते है ...........................................

आप आप है ,हम हम है

प्याज नहीं काटे ,फ़िर भी आँखे नम है ,

सप्लाय ना होनेसे सब्जी में आलू कम है .....

इससे बकवास शायरी बनाओ ,गर आपमें दम है ...................

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एक रावण, दस सर ,बीस आँखें ,फ़िर भी एक ही नजर सीता माँ पर ,

और ..........................

एक तुम ,एक सर ,दो आँखें ,फ़िर भी नज़र

आती जाती हर लड़की पर

अब बोलो रावण कौन ??????????????????????????????

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रस्ते पर खड़े संताने एक आदमी को टाइम पूछा ....

उसने घड़ी देखकर कहा ," छ: बजे है ॥"

ये सुनते ही संता ने खम्भेके साथ सर पटकना शुरू कर दिया .....

बनतासिंह ये देखकर पूछने लगा ," ओये ,प्रॉब्लम क्या है ?"

संता ," यार ,सुबह से टाइम पूछ रहा हूँ !!!!!सब अलग अलग ही बता रहे है ........."

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नए सालमें आप जो भी निर्णय लें कृपया ये जरूर ध्यान दे :

आँखें बंद करें ......दिल की आवाज सुने .....दिमाग का इस्तेमाल करें .......और फायनली

आपकी पत्नी आपसे कहें वैसा ही करें .......................

धन्यवाद ................

25 दिसम्बर 2009

गुफ्तगू ...

फासला हो चुका है दरम्यां

मिलनकी ख्वाहिश लिए

मनको भी उड़ानोंकी उम्मीद

पर ....

आप आसमां और हम जमीं

मिलने की जुत्सजू दफ़न कर चले

क्योंकि डरता है दिल ऊंचाईसे

हरदम गहराई वहीं तनहाई है

और गुफ्तगू करने हमसे सिर्फ़ एक ख़ामोशी है ......

24 दिसम्बर 2009

हमें खुश रहना है ....

हा ...हा ....हा....हा.....

लगता है सुबह सुबह में कोई लाफिंग क्लबमें घुस गए भूल से ...

नहीं नहीं मुझे खुश रहना है ..आज संकल्प करें ...मुझे खुश रहना है ...स्वाइन फ्लू की तरह ये भी तेजी से फैलने वाली बीमारी है ..चलो मोबाइल में एक जोक लिखो एस एम् एस करो ..सिर्फ़ एक ही ...और फ़िर देखो कुछ घंटो में ये कितनोके चेहरे पर हँसी का जुकाम लेकर आ जाएगा ....

हम खुश रहना चाहते है ..पर हम खुश क्यों नहीं रहते ? एक अहम् सवाल ...

हम खुश नहीं रहते क्योंकि हम खुश रहना ही नहीं चाहते ...बहुत बड़ी गड़बड़ दिख्खे है जनाब ...कुछ भी पल्ले नहीं पड़ा आज ..जरा अपनी पत्नी को किचनमें जाकर बोलो ,कोई भी उम्र की हो ," हाई ,मेरी ऐश्वर्या राइ !!!" थोड़ा झेंप जाएगी पर मुस्कुरा देगी ...अपने पतिदेव को कहो ," आज तो बिल्कुल गोविंदासे प्रेरित होकर कपड़े पहने है ????"

वो तिरछी मुस्कान का नजारा !!!! बच्चे को नई कलम का तोहफा ..या फ़िर नई कोमिक उसके टेबल पर रखना !!

अपनी कोलेज जाती लड़कीके लिए लेटेस्ट जींस की पेंट या फ़िर नई तरह की बुँदे भी चलेगी ...देखो !!वो खिली मुस्कान आपको कई गुना उनकी तरफ़से वापस मिलेगी खुशी बनकर ...जाने अनजाने इस खुशी का उधर कोई नहीं रखता ...उसे जल्द से जल्द वापस कर देता है ...कोई खास वजह से तो तोहफा हर कोई देता है पर बिना वजह दी गई एक छोटी सी चीज ये एहसास दिला देती है की तुम या आप मेरे लिए हो बहुत ही खास ...

पर अफ़सोस हमें तो ये सोचने का भी बिल्कुल वक्त नहीं नहीं ...हम बच्चोके टिफिन बॉक्स भरनेसे या पति की रोजमर्रा की जरूरत संभालने से या फ़िर घर और ऑफिस के बीच झूलने से अलावा कुछ नहीं सोच पाते ।

कहते है हमारे अर्ध जाग्रत मन की शक्ति नब्बे प्रतिशत है जो हम इस्तेमाल नहीं करते ....

ये मेरा ख़ुद का आजमाया हुआ प्रयोग है :

किसी दोस्त या रिश्तेदारसे आप कुछ लंबे अरसे से नहीं मिल पाए हो ...कुछ फोन या ख़बर नहीं ..बस उसे याद करो बड़ी शिद्दतसे ...जब वक्त मिले उसकी सूरत अपनी आँखों के सामने ला दो ...बहुत ही जल्द अचानक ही कुछ ऐसे संजोग बन जायेंगे और आप उसी व्यक्ति को मिल पाओगे या उसकी जरूर कोई न कोई ख़बर मिल जायेगी ...आपको जो लक्ष्य पाना है उसकी मन में छबि बना लो ...और उसे बार बार देखो ...वो लक्ष्य हासिल होना ही होना है ...पर इसकी एक ही शर्त भी होती है की आप किसीके बारेमें बुरा नहीं सोचोगे ...और ये कभी भी पुरा नहीं होगा ...अपने ख़ुद के काम के बारे में शंका करोगे तो जो नकारात्मक होगा वही परिणाम आएगा ...यानि कोई भी नकारात्मक विचार नहीं ...क्योंकि अर्ध जाग्रत मन इस बारे में कोई विश्लेषण नहीं कर सकता वो तो सिर्फ़ आका का हुक्म मानता है ॥

इसका मतलब ये कतई नहीं की आपकी तनख्वाह दस हजार रूपये हो और आप ख्वाब मर्सिडीज़ के देखे ...

दूसरा किसी और को देखकर जलन न रखे ...बल्कि उसकी खुशी में शामिल हो तहे दिल से बधाई दे ...मुश्किल है नामुमकिन नहीं ... बस आजू बाजू में देखकर मन मसोसना बंद करो और अपनी भीतर में झांक कर खुशी देखो ...

कोई कोई साल ऐसे आते है की उस वक्त हमारे साथ सब कुछ हमारे हित के विरुध्ध ही होता है ...लगता है सब ख़त्म हो जाएगा ...धंधे में घाटा ,घर में बीमारी , संतानका परीक्षा में विफल होना ....सब कुछ एक साथ ...नसीब को कोसते है उस वक्त ....लेकिन एक बात की और आज के बाद जरूर गौर करें की ये सब होने के बावजूद आप जिन्दा है और ये सब कुछ सहन करके भी आज खड़े है ...आपकी झेलने की शक्तिका अंदाज़ आएगा तो एक बार अपनी और आपका मान बढेगा ...आत्मविश्वास आएगा और फ़िर दुनियाकी कोई खुशी आपसे कैसे दूर रह पाएगी ????

बस अंत में इतना ही कहना है ...अपने निजी दोस्तों की सूचि में सबसे पहला नाम अपना लिखो .....

23 दिसम्बर 2009

तड़प ...

खंजरसे पूछ बैठा झख्म जरा धीरे से तो वार होगा न ?

तब बोला खंजर घायल ही होना है ठीक होने के लिए दोबारा ,

हम तुम्हारे पर अपनी निशानी छोड़ ही जायेंगे

बस ये बेदिली रिश्तेकी हलकी सी कसक छोड़ जायेंगे .....

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उस पार नहीं जानेके लिए हम लौट गए थे ,

पर जिससे चुरायी थी नज़र उन्हीसे यहाँ सामना हो गया ....

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चाँदनी रोती थी बहुत चाँदसे बिछड़ने के बाद ,

उसे क्या पता था उससे ही तो चाँद रोशन था !!!!

बिना चांदनी चाँद का वजूद ही कहाँ ?

ख़ुद चाँदनी को ही चाँद भी तरस जाता था .......

22 दिसम्बर 2009

तुम्हारी हर बात पर ...

बहुत गहराई है तुम्हारी हर बातमें ,

तुम्हारी आंखोंके नशेमें डूब जाता हूँ ,

तैरकर पार नहीं आना मुझे ,

इसीलिए हर बात अनसुनी किए जाता हूँ ....

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कुछ कहने के लिए नहीं बचा अब की ,

बस हम खामोशसे लौट आए ,

दोबारा मिलने पर बातें ख़त्म न हो पाई ,

हिजरमें पुरी रात जो बितायी थी तेरे खयालमें ......

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बेवफा कहकर ठुकरा दिया था जिन्हें ,

आज उनके दिल को चीरकर देखा तो मेरा नाम ही था .....

अफ़सोस उनको गंवाने का नहीं हुआ

अब जाकर प्यार क्या है समज आया ....

21 दिसम्बर 2009

फ़िर एक सुबह

फ़िर एक सुबह के इंतजारमें

ये दिल बेकरार हो चला

रातभर नींद न आई और

सवेरेकी तलाशमें एक और सफर तय हो चला ....

कल सवेरे आएगा सूरज

अरमानोकी डोली में बिठाकर सपनो को मेरे ,

बस बादल घिर आए और सूरज ढँक गया ,

शायद सूरज नहीं तो क्या इसका उजाला ही काफ़ी है

तलाशे मंजिल के और मक़ाम बाकी है ....

20 दिसम्बर 2009

बढे चलो ....


किसीके इंतज़ार में थमे थे कदम उस मोड़ पर अब तक ,

वो गया था कहीं दूर पर सदायें उसकी जैसे आ रही थी ....

लगता था जैसे अभी भी मुझे बुला रही थी ,

पर मेरी आवाज़ शायद मेरे हलकमें ही डूब जा रही थी ......

मेरी जिंदगी क्यों रुक जाए इस मुकाम पर ये सवाल

मैंने ख़ुद ही ख़ुद से जब पूछ डाला :

तो एक हैरतअंगेज सा जवाब पाया मैंने ....

गलती तो जनाब आप ही कर गए हो ,

चलने वाले तो चले गए अपनी मंजिल की तलाश में ,

और आप ही दीवानावार बने यहीं पर क्यो रुके रहे ?

तुम्हारी भी तलाश है किसी मंज़र पर किसी मोड़ पर खड़ी मंजिल को भी ,

जब तक नहीं चलोगे दीवाने कैसे पाओगे उसे कभी ?

ये भी कहीं कभी हो जाए जिसकी तलाशमें रुके हो यहाँ

उस मोड़ पर वो भी तुम्हारे इंतज़ारमें खड़ा मिल जाए !!!!!!!!!!!!!!!!!

19 दिसम्बर 2009

एक मूरत

मेरी जिंदगी है संगेमरमर का टुकड़ा ,

पास है हथौड़ी और छिनी भी ,

तराशने की आज़ादी भी ,

चलो बनाते है एक मूरत बिल्कुल सादी सीधी सी

जो लगे मेरे ख्यालोंके अक्स सी .....

18 दिसम्बर 2009

ख़ुद से ख़ुद मिल ...

मुझे क्यों हो किसीसे कोई शिकवा गिला ?

किसीने तो नहीं माना मुझे अपना !!!

ठंडी हवा के झोंकेमें साथ चले सब मेरे ,

बस रेगिस्तानकी कड़ी धूपमें तनहा छोड़ चले !!!!!

अकेले आए थे इस दुनिया में और अकेले ही तो जाना है ,

जानते है मानते है फ़िर भी इस दुनिया में ,

जय वीरू और हीर रान्ज़े के अफ़साने है !!!!!

देखा नहीं ख़ुद को कभी न परखने का वक्त मिला खुदको ,

वरना न ये गिले होते न शिकवे क्यों हम रह गए तनहा से !!!!

ख़ुद ही ख़ुद का मसीहा बनकर देख जरा ,

न नजर आएगा फ़िर तू यूँ डरा डरा ...!!!

17 दिसम्बर 2009

शायद ....या ....


चलो आज इस लम्हों पर

कुछ मिटटी डाल दे ...

इसे यहाँ पर छोड़कर

कदमोंको आगे की राहों पर ले चले .....

याद बनाकर इन लम्हों को साथ नहीं ले जाना है

मिलेंगे यहीं गर मुड़कर वापस आए इसी राहो पर कल ,

इस मिटटी के नीचे

शायद ये ऐसे ही मिल जाए !!!

या बारिशमें नम जमीं पर एक पौधा बन निकल आए !!!!

शायद यहाँ एक दरख़्त का रूप ले ले

और उस पर हमें पंछियोंके घरौंदे नजर आए !!!!!!

या फ़िर वक्त की आंधियां

मिटटी के साथ इन्हे भी अपने साथ दूर कहीं उडा जाए !!!!!

पर जहाँ पर भी ठहरा होगा वह लम्हा

जिंदगी के सफे पर मेरा नाम लिखकर मेरे इंतज़ारमें होगा !!!!!!

16 दिसम्बर 2009

हवाएं चली .....

हवाओंने कुछ ऐसा रुख कर दिया आज

दिलका दर्द आँखोंमें अश्क की जगह

होठों पर मुस्कराहट बन

खिलता चला गया .......

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अय खुदा जब होगा सामना तब तुझसे ये पूछेंगे ,

दिल दे दिया जब तब उसकी किस्मतमें बार बार टूटना क्यों लिख दिया ????

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दर्दकी कसक बन जाती है चिंगारी

अय बेवफा जब जहनमें नाम भी आता है तेरा ....

15 दिसम्बर 2009

चलो एस एम् एस एक नजर ...

एक कंवारी कन्या का गीत :

हसबंड हो ऐसा ...

पर्समें जिसके पैसा हो ॥

लम्बी जिसकी हाईट हो ,

गुस्से का वो लाईट हो ...

जब सास से मेरी फाईट हो ,

तो कहे मुझसे :

माय डार्लिंग तुम ही राईट हो ....

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एस एम् एस यानी क्या ?

एस : साला

एम् : मुफ्त का

एस : सिरदर्द .....

ना करो तो लोग सोचते है की कंजूस है और करो तो लोग सोचते है खाली बैठा है कुछ कामधंधा नहीं ....

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बदला जो वक्त ,वक्तकी रफ़्तार बदल गई ,

सूरज ढला तो शाम की सूरत बदल गई

एक उम्र तक हम उनकी जरूरत बने रहे

फ़िर यूँ हुआ की उनकी जरूरत ही बदल गई ......

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यु हेव क्यूट आइज़

यु हेव स्वीट वोईस

यु हेव स्मार्ट लूक्स

यु हेव स्मार्ट ब्रेन .....

............................धत्तेरीकी !!!!!!

फ़िर ग़लत नंबर पर मेसेज भेज दिया ......

12 दिसम्बर 2009

ख़ामोशी

खामोशी को कभी पढ़ा है ?

ख़ामोशी को कभी देखा है ?

ख़ामोशी को कभी सुना है ?

ख़ामोशीको कभी साँसोंमें भरा है ?

पढो उसे भूखे पेट बच्चेको सुलानेवाली माँकी निगाहों में ....

देखो उसे अपने जवान बेटेकी लाश

कांधो पर ढोकर जाने वाली बापकी हयातमें .....

सुनो एक परिवारकी भूखको मिटाने एक अबोध लड़की को

एक अधेड़के साथ ब्याहते वक्त उस माँके आंसूओ में ......

साँस डूबने लगेगी जब देखोगे उस माँ को

जो अपनी आंखोंके सामने अपने बच्चेको जिंदगी के लिए

ज़ुजते हुए देख रही हो ........

ख़ामोशी वह जुबान है जिसकी हर भाषामें एक ही अभिव्यक्ति है ...

किसी भी सच या झूठ का दबा हुआ राज़ है ....

कभी इकरारमें छलकती है कभी इनकारमें तब्दील होती है ...

न आवाज़ है न साज़ है

फ़िर भी ये ख़ामोशी दुनिया के हर अल्फाज़ को समेटे है ...

बस खामोश बनकर .....

11 दिसम्बर 2009

निष्कर्ष ...

थोड़े दिन पहले मुझे मेल पर एक सुंदर कहानी मिली थी ...उसे आज आपको कह रही हूँ ...आशा है आप सबको भी पसंद आएगी ....

पच्चीस सालका एक लड़का अपने पिताजी के साथ ट्रेनमें सफर कर रहा था ..खिड़की वाली सीट पर बैठा था ।

"पापा ,देखो ये सारे पेड़ ट्रेनसे उलटी दिशामें जा रहे है ...और कितनी स्पीडसे दौड़ते दिखाई दे रहे है !!!"

अचानक बारिश शुरू हो गई ...लड़केने हाथ बहार निकाला और बुन्दोंको हाथ पर लेकर चिल्लाने लगा ," पापा ,कितनी सुंदर अनुभूति है !!!ये बुँदे कितनी सुंदर दिखती है बारिश बनकर !!!"

फ़िर पहाडी इलाके से गुजरते वक्त तो उसका बोलना रुक ही नहीं रहा था ...खुश था वह ...उस युवक का पिता ये सब मुस्कुराकर देख रहा था ...

लेकिन उस लड़केकी हरकतसे वहां पास बैठा हुआ युवा युगल बहुत ही परेशां हो गया था ...उसे उसकी बचकाना हरकतों से अब तो गुस्सा ही आ रहा था ...

अंत में उनसे रहा नहीं गया तो उस युवक के पिता को उन्होंने कहा ," आपको इसे किसी अच्छे हॉस्पिटलमें ले जाना चाहिए और उसका इलाज कराना चाहिए ....."

पिताने उत्तर दिया ," हाँ ,आपने ठीक ही कहा है ...मैं उसे आज ही हॉस्पिटलसे लेकर घर ले कर जा रहा हूँ ...वो आज उसके जन्म के बाद पहली बार इस दुनिया को अपनी आंखोंसे देख रहा है ...."

====सार : किसी भी बात पार निष्कर्ष पर पंहुचते हुए एक बार जरूर सोचो ....कभी सत्य ऐसा भी हो सकता है ...

10 दिसम्बर 2009

सच .....बस .....

एक सच ....

जिसे सुनने तरस जाते है ये कर्ण पटल मेरे ,

पर जब सुने तो दिलोदिमाग पर दरारे पड़ जाती है .......

कोई सच दुनियाकी सारी खुशियाँ समेटकर ला सकता है ...

कोई सच बनता है एक सपना तो हमें जिन्दा बना जाता है ...

कोई सच बसी बसाई दुनिया उजाड़ सकता है ....

कोई सच बनते बनते सपना बूढा हो जाता है ....

कोई सच सपना पुरा होनेकी राहमें दम तोड़ जाता है ....

सच दूसरोंके बारेमें बताना बड़ा आसान होता है ....

पर अपने सचको आयने में देखना भी सबसे मुश्किल हो जाता है .....

बस ढूंढते जाओ राहों पर तो भी इस दुनिया में

चेहरों पर सच दिखाई देना मुश्किल हो जाता है .......

9 दिसम्बर 2009

शब्द ...

एक बीज ....

शब्द है वह ...

पनपता है ,धरती के दिल को चीरता हुआ दिख जाता है ,

कभी शब्दोंकी बेले झूल जाती है ,

कभी उस पर नज़्मके फूल खिल जाते है ....

कभी टूटे पत्ते पर बैठकर उड़ जाते है हवा की आवाज बन ,

कभी नावके पस्तुल पर बैठ लहरोंसे अठखेलियाँ कर लेते है ....

सागरकी मौजो पर सवार हो समुन्दरके सूर बन

एक नगमा गुनगुनाते है ....

कभी कोयल की हुक बन कभी

कुत्तेका दर्द बन सुनी रातमें भय घोल जाते है ...

कभी अल्लाह की आजान बन कभी मन्दिरमें आरती बन ,

कभी भक्तों के दोहोंमें निराकार दुआ बन नजर जाता है ...

कभी रुदालीके गान में करुनाकी दुहाई दे जाता है ....

शब्द शब्द जो आवाजसे जुड़ जाता है ,

दर्द कसक की अठखेलियों में या प्यार के गुलमें ...

कभी मौन बनकर भी निखर जाता है ....

8 दिसम्बर 2009

एक सवाल ??

रुके रुके से शब्द होठोंकी कैदमें सिमट कर रह गए ,

फ़िर भी वो आंखोंकी जुबानी बहुत कुछ कह गए ...

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तुम्हे पानेकी ख्वाहिशमें सब भुला चुके थे हम

गुमशुदा उस लिफाफे पर तेरा पता लिखना भूल गए थे हम ...

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क्यों चोरी चोरी से ही प्यार किया जाता है ?

क्या ये कोई जुर्म या गुनाह है ?

जो इस दुनियाके रहमोकरम पर जिया जाता है ?

गुजर जाते है हर खौफसे हंसकर

जहाँके तब जाकर इन्तेहाँ पर आया जाता है ...........

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7 दिसम्बर 2009

आसमान और जमीं

कल मिलना हुआ मेरे दोस्त को ,

मैंने पूछा ," क्या कहोगी दोस्ती को अपनी ?"

"होगी आसमां की तरह ? या विशाल गहरे सागर सी ?"

उसने कहा की," होगी आसमां सी ऊँची ....

टीम टीम करते तारों सी ,चमकते सूरज सी और शीतल चाँदनी सी ...."

मैंने कहा ,"होगी वो गहरे सागर सी ,

भाप बनकर उड़े कभी आसमां में तो

बारिश बनकर बरसेगी जमीं पर ही फ़िर से ,

गर बिछड़े कभी तो दिल में आस लिए की

हम है तो इसी दुनिया में कहीं न कहीं फ़िर मिलेंगे ही ..."

आसमान को लेकर मैं क्या करूँ मुठ्ठी मैं कैद करूँ

और खोलकर देखता हूँ तो मुठ्ठी खाली ही खाली है ,

तुझे तारोसा देखूं तो भूलभुलैया लागे है ,

सूरज से जलता है दामन मेरा और चाँद की तरह लुकाछिपी ?

दोस्त तुम आसमान हो और मैं जमीं ...

मिलकर भी जो मिले न कभी ....

6 दिसम्बर 2009

एक तड़प ....एक कसक ...

दुझते रिसते झख्मोंका वह बाकी निशां

दिल की तहोंमें दफ़न करके बैठ जाएँ ,

आज तेरी यादोंके आगोशमें लिपटकर

बस नूरके इक बूंद को हलकसे निगल जाएँ .....

वफ़ाकी जो रस्म थी बदस्तूर हम निभाए है ,

बस मिलनके मक़ाम पर हम सफर आधा छोड़ आए ...

प्याससे सूखे लबोंमें शबनमकी हिफाजत होती है ,

प्यार छलक कर बह जाए ये हमें गवारा न हुआ ,

काफी था बस दिलमें एक टीस बन जिन्दा रहना ,

किसीकी कब्र पर बैठ सपनोका आशियाना बनाना ...

खुशियों पर अपनी किसीके अरमान दफन करके

हमारा प्यार का आखरी मक़ाम यूँ दागदार न हुआ .....

5 दिसम्बर 2009

नज़्म ....


अय नज़्म आज तेरी नजाकतके नाम :


पलकोंका भी बोज लागे तोरे नयननको ,

खुले बोजिलसे जब उठे लिए लालिमा .....

तोरे होठ खुले जब कांपने लागे है लब्जोंका जैसे लिए हो बोज ,

तेरी हलकसे कुछ सूर आ पाये बहार और कुछ हवामें घुले .....

तेरी आवाज है कोकिल का माधुर्य समेटे हुए ...

जैसे सुरीली बांसुरी कोई मधु का रस घोले कानों में .....

नजाकत तेरे बोलोंमें सिमट कर आए जैसे ,

कोमल घास भी निशाँ बनाकर जाए तेरे पाँव पर ......

सुबहकी धुपमें जो छलके पसीना तेरे चेहरे पर

जैसे शमा घुल रही हो जो अब तक जली भी नहीं ....

तेरे समीप बैठकर तुझमे पुरा ध्यान लगाकर बैठे हम ,

इस दुनियासे बेसुध हो बेखबर हो

जैसे डूबे जा रहे हो एक अनंत आनंद के गहरे सागरमें ....

अय नज़्म तू दुल्हन मेरी सिमटी हुई मेरी किताबके सफे पर ...

हर वक्त नया अर्थ दे गुजरती जब इस सफे पर आ कर रुक जाऊं ...

4 दिसम्बर 2009

ख़ुदसे अनजान हूँ मैं ....

चारसौवी पोस्ट के साथ नए साल में प्रवेश कर रही हूँ :

दूर सुदूर कोई पुकार आ रही थी

जाने वो क्यों मुझे अपनी और खींचे जा रही थी !!!!!

अपने से बाहर ख़ुद मैं ही मुझे बुला रही थी ...

ये आभास था या आयना ?

हमें हर शख्समें अपनी सूरत नजर आ रही थी .....

किसी ने रोक कर पूछा मुझे

हरदम तेरा चेहरा यूँ हँसता क्यों दिखे है ?

हमने कहा क्या करे ?

रोते रोते सारे आंसू सूख चुके है ...

इस हालातमें हम कुछ दुनिया पर

और कुछ हम ख़ुद पर ही हंस रहे है !!!!!!

हर नए दिन के साथ कभी लगा मैं

हर चीज़ जानती हूँ अपने बारे मैं ...

पर हर कलम परस्ती के बाद ये ही लगा ,

अरे मैं ख़ुद से ही अनजान थी अब तक .....

3 दिसम्बर 2009

"जिंदगी : जियो हर पल "

४ दिसंबर ,२००८ ....

ये तारीख मेरे जीवनकी तवारीखमें एक अहम् स्थान रख रही है क्योंकि इस दिन "जिंदगी : जियो हर पल " का जनम हुआ था .आज से एक साल पहले ॥

लगभग जुलाई २००७से मैंने इन्टरनेट पर लिखना शुरू किया था .पर मैं एक लोकप्रिय सोशियल नेटवर्क साईट पर लिखती थी ..उन लोगने मुझे तभी अपना ब्लॉग लिखने के लिए कहा पर मैं वहां ही लिखती रही ...किसी कारणवश एक दिन एक मेल मिला मुझे की एक महीने के अन्दर ये साईट बंद होने जा रही है ...आप अपना डाटा सेव कर लें ...

उस वक्त मुझे हर्पिस हुआ था ...ये चिकन पाक्स होता है जो चमड़ी के बाहर नहीं पर शरीर के अन्दर नसों पर होता है ...और मुझे ये हुआ था दायें दिमागकी नसों पर ...पुरा दिन जोरोंके झटके लगते थे सर में ...और ये रोग के बारेमें जानकारी नहीं थी इस लिए जल्द पता नहीं चल पाया ...आख़िर चमड़ी के विशेषज्ञने निदान किया और इलाज शुरू हुआ ...तब तक दाई आँख तक इन्फेक्शन फ़ैल चुका था ...और ये अंधेपनमें भी परिवर्तित हो सकता था ...

मैंने अपनी पोस्ट को कभी सेव नहीं किया था ...और इस बीमारी में पढ़ना लिखना टी वी देखना सभी मना था ...सिर्फ़ आराम करना था ...तब सिर्फ़ दस मिनट तक मैं अपने कोम्प्यूटर पर ३०० के ऊपर मेरी पोस्ट सेव करने लगी ...और उसके लिए मैंने अपना ये ब्लॉग

"जिंदगी : जियो हर पल " का स्थान बनाया ...डिसेम्बर २००८ के ३५ पोस्ट ये कॉपी पेस्ट की हुई पोस्ट बनी ...और फ़िर मेरे कोम्प्यूटर पर वायरस आने के कारण मेरा सेव किया सारा डाटा नष्ट हो गया ...लेकिन मैंने देखा की मेरी लिखावटमें जो मेच्योरिटी आ रही है वो पुरानी पोस्ट में शायद नहीं थी ...कोई अफ़सोस न करते हुए मैंने फ़िर से लिखना शुरू कर दिया ....अभी भी मैं सिर्फ़ पन्द्रह मिनट ही दे पाती थी ....तीन महीने तक मुझे चिकित्सा लेनी पड़ी ...लेकिन जिस हालतमें इस ब्लॉग का जनम हुआ उसके नामकरण की वजह ये ही थी की मुझे अपनी बीमारी से लड़ते सिर्फ़ रोज के बीस मिनट के हिसाब से मेरी कलम को जिन्दा रखना था ....

आज तक जो भी पाठक यहाँ पर अतिथि बन आए है और जिन्होंने अपनी टिप्पणी देकर मेरा हौसला बढ़ाया है उन सब की मैं तहे दिल से शुक्र गुजार हूँ .......

2 दिसम्बर 2009

यकीं ...

कहीं दिनके उजालोंमें

कहीं रातके गहरे सायोंमें

मैंने देखा इस दुनियाका रंग रूप

बदलते चेहरे और रुखसारों पर ......

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हम रहे या न रहे ,

तेरे दिलमें मेरा बसेरा है

यकीं था तुम पर ख़ुद से ज्यादा ....

वक्त करवट लेते ही बदल गया हर रंग ,

लौटा तुझ पर भरोसे से ,

बिखरे मिले आँगनमें ख्वाबके आशियानेके

टुकड़े बिखरे बिखरे से .........

1 दिसम्बर 2009

अभी भी याद है ....

वैसे तो चेहरा आपका बराबर लगता है ,

फ़िर भी कभी कभी देखनेसे डर लगता है ....

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जब देखा उन्हें तिरछी नजरसे

तब मैं मदहोश हो गया ...

पर जब ये पता चला उनकी नजर ही तिरछी है

तब तो बेहोश हो गया .....

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एक बार दिल दे दिया था अभी भी याद है ....

और फ़िर भरता रहा होटलके बिल अभी भी याद है ....

प्रियतम ! हाँ ,तुम्हारे चेहरे पर मुंहासे और खिलकी खेती अभी भी याद है ...

मेरे पैसोंसे लगाया करती थी क्लिअरेसिल अभी भी याद है ....

साइकिल टकरा कर सोरी कहनेवाली स्किल अभी भी याद है ...

और बादमें मिली हुई सेंडलकी हील अभी भी याद है ....

मानता था मैं और तुम पहिये है संसार रथके

और पड़ोसमें थे तुम्हारे काफ़ी स्पैर व्हील अभी भी याद है ......