आज सुबहकी चाय के कपमें चाय की जगह चिठ्ठी पायी ,
आज इस कपमें प्यार भरा है आज इसे जी भर के पी लो ....
नाश्ते की डिशमें चिठ्ठी ही पायी लिखा ये था ,
प्यार तो महसूस करने की दास्ताँ है ये दिखेगी नहीं ......
लंच बॉक्स लेकर ऑफिस रवाना हुआ ,
वहां भी दोपहर को हर डिब्बेमें चिठ्ठी का पाना हुआ ,
यहाँ प्यार रूप बदल कर मौजूद रहा ,
लाल हरी पिली चिठ्ठी में रंग और स्वाद मिला रहा ...,
आधे दिन की छुट्टी थी घर आया तो ताला था ,
खोलकर दरवाजा अन्दर गया तो डाइनिंग टेबल केसेरोल से सजा था ,
इतना स्वादिष्ट खाना पहले कभी नही लगा क्योंकि ये प्यारकी गार्निश थी ,
पानी के ग्लास के नीचे दो सिनेमा की टिकेट थी ....
हँसता हुआ मैं तैयार होकर रवाना हुआ ,
वहां पर मेरी हमसफ़र हमनवा खड़ी थी बाहर ,
पहनकर मेरी सबसे ज्यादा पसंदीदा साड़ी ...
दोनोने हाथमें हाथ डालकर हॉलमें एंट्री ले ली .....
और फ़िर देखी भी क्या ये सिनेमा ,
नाम था जिसका रब ने बना दी जोड़ी ..........
