11 सितंबर 2010

वक्रतुंड महाकाय......

आज त्यौहारों का त्रिवेणी संगम आया है ,
गणपति बाप्पा के साथ ईद की सेवैयाँ भी लाया है ,
मिच्छामी दुक्कडम सिर्फ जैन धर्म के लिए नहीं
हम सब के लिए सन्देश देता है
पुराने सब बैर भुला दो ,सुख शांति से समय बिताओ ,
ये जिंदगी तो बस एक बार ही आनी है
उसे आपसी बैर में क्यों सबको गवानी है ?
सिध्धि विनायक खुद विघ्न हर्ता बनकर
साथ सब के आये है ...
चलो आज सब हम गिले मिल जाए ...
मोदक सेवैयाँ साथ खाए ....
दूसरों से क्षमा मांगकर आपसी बैर मिटायें ....
=============================================
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्न कुरु में देव ,सर्वकार्येषु सर्वदा ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. गणेशचतुर्थी और ईद की मंगलमय कामनाये !

    अच्छी पंक्तिया लिखी है आपने ...

    इस पर अपनी राय दे :-
    (काबा - मुस्लिम तीर्थ या एक रहस्य ...)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_11.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह! बहुत अच्छे विचार।
    पुराने सब बैर भुला दो ,सुख शांति से समय बिताओ ,
    ये जिंदगी तो बस एक बार ही आनी है
    उसे आपसी बैर में क्यों सबको गवानी है ?

    आपको और आपके परिवार को तीज, गणेश चतुर्थी और ईद की हार्दिक शुभकामनाएं!
    फ़ुरसत से फ़ुरसत में … अमृता प्रीतम जी की आत्मकथा …पढिए!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर पोस्ट । आपको भी शुभकामनाएं और बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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