8 दिसंबर 2009

एक सवाल ??

रुके रुके से शब्द होठोंकी कैदमें सिमट कर रह गए ,

फ़िर भी वो आंखोंकी जुबानी बहुत कुछ कह गए ...

===============================

तुम्हे पानेकी ख्वाहिशमें सब भुला चुके थे हम

गुमशुदा उस लिफाफे पर तेरा पता लिखना भूल गए थे हम ...

======================================

क्यों चोरी चोरी से ही प्यार किया जाता है ?

क्या ये कोई जुर्म या गुनाह है ?

जो इस दुनियाके रहमोकरम पर जिया जाता है ?

गुजर जाते है हर खौफसे हंसकर

जहाँके तब जाकर इन्तेहाँ पर आया जाता है ...........

====================================

1 टिप्पणी:

  1. क्यों चोरी चोरी से ही प्यार किया जाता है ?
    क्या ये कोई जुर्म या गुनाह है ?
    भावावेग की स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वाभाविक परिणति दीखती है।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...