23 जनवरी 2026

सन्नाटा

यहां चारों ओर सन्नाटे हैं ,
भीतर मे बहुत शोर है....
बाहर से भीतर के बीच एक पूरी यात्रा है,
सारे सन्नाटे यहां बोलते है, 
शोर मचाते हैं .
और शोर ??
खुद खामोश खड़ा देख रहा है ,
भीतर की यह कशमकशे.. 
इंसान दुनिया से जुड़कर भी
देखो ना कितना अकेला है...

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