भीतर मे बहुत शोर है....
बाहर से भीतर के बीच एक पूरी यात्रा है,
सारे सन्नाटे यहां बोलते है,
शोर मचाते हैं .
और शोर ??
खुद खामोश खड़ा देख रहा है ,
भीतर की यह कशमकशे..
इंसान दुनिया से जुड़कर भी
देखो ना कितना अकेला है...
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पायी ...
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