कभी खिड़की से झांखती ,
कभी पलकें बिछाएं करती मेरा इंतज़ार ,
मुझे तेरी तलाश थी ,
तेरा दिल भी था मेरे लिए बेकरार ....
पर नही मिलना था मुझे ,
तुझसे जो किये थे
वादे नही कर पाई पूरे ,
तू समझती बिन पूछे मुझे .....
पर मैं खुद से शर्मिंदा नही हो पाती ....
चल आज गले लग जाए ,
न मुझे कोई गिला तुझसे ,
न कोई शिकवा तुझे भी होगा ,
अधूरे अधूरे से हम फिर भी पूरे पूरे से हो जाए....
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
17 अप्रैल 2018
जिंदगी
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