27 जनवरी 2013

अचानक...!!!

अचानक सामना हो गया ,
आयने से मेरा कल ...
लगा बहते वक्त के साथ
उसकी भी उम्र मेरे जितनी ही है .....
मैंने सोचा राह पर अकेली चलती रही थी ,
पर वो अक्स गवाह है की
मुझे कभी अकेले छोड़ा ही न गया था ......
रूहमें था छुपा छुपा ,
मेरा आयना बस थोड़ी सी गर्द लिए
वक्त गर्द बनकर जम सा गया था ....
यादोंकी बौछारोंसे नमीकी शबनम
क्या गिर गयी उस पर ...
और बस तन्हाई दूर चली गयी ,
मेरे अक्सने मेरा हाथ जो थामा था मेरा ...!!!!

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