28 अप्रैल 2010

चाँद ...

कल रात चौदवीका चाँद

गगनकी सैर को आया था ...

मेरी खिड़की के शीशे में ...

अपना अक्स देखकर वो भी इतराया था ....

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चांदके कागज़ पर सितारोंने एक नज़्म लिखी है ...

ना आये गर समज में हर किसीकी वो ...

उसे समजने बस एक नियामत खुदा से पानी है ,

बस इश्क हो जाए किसीसे तो वो खुद ब खुद समज आ जानी है ....

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