यकीं नहीं अब उस पर रहा ,
हर पल खाते थे कसम दोस्ती की ,
फ़िर भी परदा ही करते रहे हर बात पर ,
अब बेवफा हमें कह दिया ???
दोस्तीके मायने गर समज न आए तो
दोस्ती किसीसे ना कीजे ...
अगर ख़ुद पर यकीं ना रहे तो
औरों को बेवफा मत समजिये ...
मूड जाते है अब इसी मोड़ पर
एक हँसी अंजाम देकर ,
गर मिल गए फ़िर से रास्ते
बस पहचानकर एक मुस्कान दीजे ...
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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दोस्तीके मायने गर समज न आए तो
जवाब देंहटाएंदोस्ती किसीसे ना कीजे ...
बहुत सही कहा आपने,
दोस्ती करने से पहले दोस्ती की समझदारी भी देख ले,
बेवफा कहने से पहले खुद की वफ़ादारी भी देख ले
waah .............bahut khoob !
जवाब देंहटाएंभावपूर्ण रचना...पर जरा वर्तनी में सुधार कर लें...और फिर से पोस्ट कर दें...
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