14 जून 2012

एक बूंदमें....

एक बूंदमें सिमट कर सागर आया ,
बरखाकी जड़ीमें उसने सागर बरसाया ....
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तेरी राह तकते है आज भी आसमानोंमें
शायद वो अरमान तारे बनकर चमक जाए फिर कभी ...
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तेरी याद आती है आज भी ,
वो सावनमें पहली बार जब साथ भीगे थे .......

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