11 मई 2012

सुबहकी ठोकरसे...

धूपकी चद्दर कुछ मैलीसे लगती है ,
जब हवाए चलती है तेज तेज ...
हारती हुई धूप  चुपचाप खड़ी है पेड़की छाँव तले ,
बादलको कोसती हुई ,सूरज की जुदाईमें ....
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हमारे सारे सपने कल चाँद चुराकर ले गया ,
सिरहाने जो सजाके रखे थे उसीके लिए ...
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हवाओमे नमीकी सीलन लग गयी जबसे ,
खामोशियोके दायरे हमतुमके बीच कायम हुए ....
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उस प्यारको क्या कहें ?? जिसका कभी इज़हार न हो ,
बस दो लम्होंका सपना था , जो सुबहकी ठोकरसे टूट गया ....

1 टिप्पणी:

  1. हमारे सारे सपने कल चाँद चुराकर ले गया ,
    सिरहाने जो सजाके रखे थे उसीके लिए ...

    wah wah wah
    http://blondmedia.blogspot.in/

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