31 अगस्त 2010

उम्मीदसे दुनिया कायम है ...

कहीं कोई उम्मीद बाकी है
वर्ना रोज खिड़की पर निगाहें नहीं दौड़ जाती !!!!
कहीं कोई उम्मीद बाकी है
वर्ना इंसानियतका नर्म चेहरा यूँ नज़र नहीं आता !!!
कहीं कोई उम्मीद बाकी है
वर्ना तुम पर यूँ ऐतबार कायम ना होता !!!!!
कहीं कोई उम्मीद बाकी है
ना उम्मीदीकी सारी वजह के बाद हमारी यूँ मुलाकात नहीं होती !!!!!

2 टिप्पणियाँ:

  1. उम्मीदो पर तो दुनिया टिकी है……………॥बह्त बढिया

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