चारसौवी पोस्ट के साथ नए साल में प्रवेश कर रही हूँ :
दूर सुदूर कोई पुकार आ रही थी
जाने वो क्यों मुझे अपनी और खींचे जा रही थी !!!!!
अपने से बाहर ख़ुद मैं ही मुझे बुला रही थी ...
ये आभास था या आयना ?
हमें हर शख्समें अपनी सूरत नजर आ रही थी .....
किसी ने रोक कर पूछा मुझे
हरदम तेरा चेहरा यूँ हँसता क्यों दिखे है ?
हमने कहा क्या करे ?
रोते रोते सारे आंसू सूख चुके है ...
इस हालातमें हम कुछ दुनिया पर
और कुछ हम ख़ुद पर ही हंस रहे है !!!!!!
हर नए दिन के साथ कभी लगा मैं
हर चीज़ जानती हूँ अपने बारे मैं ...
पर हर कलम परस्ती के बाद ये ही लगा ,
अरे मैं ख़ुद से ही अनजान थी अब तक .....
sundar sundar bahut sundar...keep doing well !!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंJai Ho mangalmay ho
ब्लॉगिंग का नया साल आपको मुबारक हो।
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सांसद/विधायक की बात की तनख्वाह लेते हैं?
अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा ?
400 vi post ki badhayi
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi sundar bhav.......gazab ka likha hai.
अच्छी रचना। बधाई।
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