5 सितंबर 2009

चोरी हो गई

कल लगा जैसे मेरी कलमसे किसीने स्याही चुरा ली ,

दावत घिस रही थी कोरे कागज़ पर

और कागज़ भी कोरा रह जाता था कुछ निशान सा बनाकर ,

भेज दिया उसे वैसे ही ,पढने वाला मेरे जज्बात को पढ़ ही लेगा .....

==========================================

गममें डूबा था दिल और शाम भी उदास थी

दिल याद कर रहा था किसीको ,

बस फ़िर एक आवाज आई और फ़िर क्या ?

मैं तो नींदमें थी और सपने से जाग गई .....

3 टिप्‍पणियां:

  1. और कागज़ भी कोरा रह जाता था कुछ निशान सा बनाकर ,

    भेज दिया उसे वैसे ही ,पढने वाला मेरे जज्बात को पढ़ ही लेगा .....

    ..कितनी भी स्याही हो, लिखने से कुछ न कुछ छूट ही जाता है.
    खूबसूरत

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...