29 अगस्त 2009

मैं वजह ढूँढता रहा ...

दिल जल रहा है ,

धुएं को निगल रहे है ,

ताकि ,

उन्हें पता ना चले हम राख हो गए .....

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तुम्हारी बेवफाई की लो जीत हो गई ,

लो फ़िर उसकी वेदी पर के और वफ़ा कुर्बान हो गई ....

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प्यार करने की कोई वजह होती नहीं पर फ़िर भी ये कर लिया ,

लो वो हमें अकेले छोड़कर चल दिए ,और मैं वजह ढूँढता रहा ....

3 टिप्‍पणियां:

  1. हमारे ब्लॉग पर आयें ,आपके लिए एक सरप्राइज़ है http://katrane.blogspot.com/2009/08/blog-post_28.html

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  2. दिल जल रहा है ,

    धुएं को निगल रहे है ,

    ताकि ,

    उन्हें पता ना चले हम राख हो गए .....
    waah gazab ki baat keh di,yahi pyar hai,bahut sunder.

    उत्तर देंहटाएं

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