27 जुलाई 2009

अय जिंदगी गले लगा ले ....

आ जाया करो चुपकेसे इस तरह की आने पर आहट न हो ,

ठहर जाओ इस तरह जैसे हवामें भीगी खुशबू हो ,

जाओ मत जिंदगीसे मेरी, मेरी जिंदगी बनकर रुक भी जाओ ,

जिन राहों पर तुम कदम बढ़ाओ हम चले तुम्हारे साथ परछाईं बनकर ....

==================================================

बादलकी बून्दोंसे ऑस बनने की ख्वाहिश की मैंने ,

एक पत्थरदिल सनमसे प्यार की गुजारिश की मैंने ,

फूलों की राह कांटे चुभे फ़िर भी तुमसे आशिकी की मैंने ,

फ़ना तो होना था मुझे आपके ही प्यार में तय किया था जब ,

इश्क न सही नफरत बनकर ही आपके दिलमें ,

दो पल के लिए ही सही रिहाईश की मैंने ......

======================================

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...