20 जून 2009

२१ जून -विश्व संगीत दिवस


जहाँ ये सारा फलक है मेरा ,

तुम्हे सजा दूँ ,संवारू एक गीत बनाकर ....


सूर बनेंगे तेरे पायल की झंकार

धून बजायेंगे तेरे कंगन खनककर

मुस्कराहट तेरी एक गीत बनकर आएगी

बरसेगा जब सावन अबके फिजा टिप टिप आवाजमें गुनगुनायेगी .....


ये सुनकर झुमका डोला और बोला जैसे बांसुरी

तुम्हारे नयन पलकों से झाँख रहे एक नए तराने से

धानी चुनर को भी सुरों की बारिशमें नहाना है ......

तुम्हारी बिंदिया को भी नया गीत गाना है ....

देखो गरजत बरसत कारे घन नीले आसमांको सजायो है ,

कड़कती बिजलीसे चमकते हुए राग मल्हार रिझायो है ,

धरतीकी तपिश के शोलों को अब थोडी भीगी हवाएं देते जाओ ,

डौल रही धरती है कहते हुए मौसमको भी सुनते जाओ .....

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