रातकी हर करवट एक सिलवट बनाती गयी ,
मेरे खयाल को मढ़ दिया हर सिलवट पर .....
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दर्द की काली स्याही को
बिदा कर दिया दुल्हनके सुर्ख जोड़े में सजाकर ....
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नश्तरसे गुजरती हर गलीमें तेरी बेवफाई के चर्चे थे ,
रास्ता पूरा टूटे हुए दिलों की किरचोंसे सजा हुआ था ....
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अफ़साने तो लिखे थे वफ़ाके शहरकी हर दीवार पर ,
पर हर अफसाना अधुरा था मेरा तेरे नाम के बगैर ....
बहुत भावपूर्ण सुन्दर..
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