रातकी हर करवट एक सिलवट बनाती गयी ,
मेरे खयाल को मढ़ दिया हर सिलवट पर .....
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दर्द की काली स्याही को
बिदा कर दिया दुल्हनके सुर्ख जोड़े में सजाकर ....
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नश्तरसे गुजरती हर गलीमें तेरी बेवफाई के चर्चे थे ,
रास्ता पूरा टूटे हुए दिलों की किरचोंसे सजा हुआ था ....
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अफ़साने तो लिखे थे वफ़ाके शहरकी हर दीवार पर ,
पर हर अफसाना अधुरा था मेरा तेरे नाम के बगैर ....
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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