कभी सहरसे शामकी मुलाकात तो होती
बतिया लेते दोनों क्या गुजरी उन पर भी .....
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सूरज जल जाता है सालोंसे
फिर भी खाक नहीं हुआ ...
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दिन को नींद ना आती हो इंतज़ारमें रातके
रात भी बेखबर जगती रहती है सुबहके इंतज़ारमें ....
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
24 जनवरी 2011
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