हर सुबह कुछ कहती है ,
कानोमें फुसफुसाती है ,
धीरे से हंस देती है ,
फिर नाक चिढाती है ,
हर सुबह कुछ कहती है ..........
मीठी आवाजमें गुनगुनाती है ,
कभी शोर मचाती है ,
कभी चुप हो जाती है ,
कभी नगमे छोड़ जाती है ,
कभी आह बनकर सांस रोक जाती है ,
हर सुबह कुछ कह जाती है ...........
जाओ आज इतवार है ,
तुम कितना भी जोर लगा लो ,
आज मेरी भी जिद्द है तुम पर ,
कम्बलके नीचेसे सर नहीं निकलेगा ,
आज हर सपना पूरा होकर ही दम लेगा ,
बैठी रहना मेरी राह तकते,
मेरी इल्तजा सुनकर आज सुबह रुक जाती है ......
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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बढ़िया है...
जवाब देंहटाएंबहुत खूब। शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर कविता...
जवाब देंहटाएंइतवार के दिन तो आप,
जवाब देंहटाएंकाफी बेहतर कविता बनाती है !
लिखते रहिये ..