तुम मिले तो क्या मिले ,चलते रहे कुछ सिलसिले ,
हवाओंमें,फिजाओमें ,रंगत घुल गई ,प्यार परवान चढ़ गया ...
साँसोंमें ,खयालोमें ,पलकोंमें तुमने आशियाना एक बनाया ,
मेरी जिंदगानी के बंद दरवाजे पर चुपकेसे दस्तक दे दिया ....
बंद दरवाजेके दूसरी और तुम्हारी साँसे सुनाई देती थी ,
हवाओमें हम दोनोकी खामोशी जैसे प्यार का गीत गाती थी .....
शब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
तुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई ....
बंद होते पलके ,अहसासने कुछ घुटन महसूस हुई तो लबोंको खोल दिया ,
रुक जाओ मेरी जिंदगी में जिंदगीभर के लिए ये हौले से बोल दिया .......
प्रीति जी,अच्छी रचना है।बधाई।
जवाब देंहटाएंbahut sundar hamesha ki tarah....
जवाब देंहटाएंwah wah.
जवाब देंहटाएंशब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
जवाब देंहटाएंतुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई ....
bahut badhiya
शब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
जवाब देंहटाएंतुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई
सुंदर अभिव्यक्ति . बधाई.
सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई.
जवाब देंहटाएंचन्द्र मोहन गुप्त