11 अक्तूबर 2015

यादों के ताज महल ..!!!

मैं , तुम यानि की हम ,
ये जो पल जी रहे है आज में ,
बैठकर सोचते है की
ये वक्त क्यों ऐसा है ???
सब कुछ ठीक कब होगा ???
पर ये वक्त की राह जाती है
अक्सर यादों के शहर में ,
वहाँ बीच शहर के मोहल्ला है ,
उस गली में ये यादें जाकर
अक्सर बस जाती है ,
गुजरता हर लम्हा वक्त के लिबास में  वहीँ जाता है
पर कमाल की बात है ये कि
वहाँ पर जगह की कोई कमी नहीं हुई  ,
बस हमारे दिल की तरह  … !!!
वो आने वाला वक्त कभी आज में तब्दील होगा तब
जाकर टटोलेंगे हम ,
ये मक़ाम जहाँ उस गली में यादों का बसेरा है  …
तब ये सोचेंगे ये वक्त कितना अच्छा था !!!
काश ये लौटकर दोबारा आये आज में !!!!
बस ये यादों के ताज महल हमारे साथ बने थे  …
और ये  अमर हो जाएंगे हमारे जाने के बाद भी  ....... 

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