16 अप्रैल 2013

तेरी मोहब्बतें

कभी कभी ये चमत्कार भी नज़र आते है ज़मानेमें ,
खरोचोंके निशानोंमें से फूल खिल कर आते है ...
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गुदगुदाते है ये जख्म भी हमें अक्सर ,
गर ये तुम्हारे यादोंकी गली से आते है ....
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तुम्हे देखने को तरस गयी थी मेरी नज़र
ये नज़र का धोखा हो मेरा की वो मकां तेरा खंडहरमें रहा ...
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ज़मानेभर की झिल्लतें उठानेकी मुझमे थी ताकत ,
जब तक मेरी रगोंमें तेरी मोहब्बतें बहती रही लहू बनकर ...

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