20 जून 2012

सिर्फ नमी थी .....

जिसे पाया ही न था कभी
उसे खोने का गम आज है ,
क्या पता था क्या कमी थी ,
बस उसके बाद आँखोंमें सिर्फ नमी थी .....
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कोई किसीको मजबूर क्यों करे ??
ये दिल ही कमजोर निकल जाता है ,
जो मुमकिन न हो पूरा होना ,
वो ख्वाब आँखोंको दे जाता है .....
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तरसती नज़रको कहो जरा परदा कर ले चिलमनका ,
वो बंज़र राहोंमे कोई निशाँ बाकी रखा होगा बेमुर्रवतने ....
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राहें इश्ककी काँटोंकी डगर है ये कहा किसने ,
चलकर देखो हर चुभन फूलोंसी नर्म महसूस होगी ....

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