3 मई 2012

न !!!

तुम प्यार करने का बहाना हो ,
तुम याद आने का बहाना हो ,
तुम रूठ जाने का बहाना हो ,
बस इतना कह दूँ की तुम जीने का बहाना हो !!!!
क्यों जीने के लिए कोई वजह ढूंढते है हम ?
बस इतना कहने के लिए 
की तुम मेरे जीने की वजह हो ???
क्या मेरी आँखे गूंगी हो गयी है ??
जो हमेशा तुम पढ़ लेते हो !!!
न !!!
वो तो चुप है इस लिए कि ,
वो हम दोनों के बीच नहीं आ सकती !!!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. गूंगी आखें .......बेहतरीन उपमा । प्रीति जी शुभकामनाएं

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  2. बहुत खुबसूरत बहाना है..... sundar rachna ......

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