16 अप्रैल 2012

इंतजार कर रही हूँ .....

मिलती हूँ उससे हर रोज ख्वाबोंमें
पर चुपकेसे उसे देखनेमें मजा आता है ,
पुकारकर छुप जाती हूँ ख्यालोंके जंगलमें ,
पेड़की टहनी पकड़कर ख़ुशीके झूले झूलनेका मजा आता है ,
वहां पर आकर ठहरता है एक पंछी
और अपने कलशोरसे हवाओको भर देता है ,
मैं उसे कहती हूँ
सिर्फ मुझे पता है तुमने उसका सन्देश दिया है ,
उसे कहो मैं इस दरख्त पर उसका इंतजार कर रही हूँ .....

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