9 अप्रैल 2012

प्रकृति आपसमें बातें कर रही थी

कल सारी प्रकृति आपसमें बातें कर रही थी ,
अपनी वेशभूषा बदलनेके बारे में सोच रही थी .....
चाँदने कहा अब मैं गोल नहीं चौकोर होकर आऊंगा ,
मेरा रंग सफ़ेद ही क्यों मैं तो हरे रंगकी कमीज सिलवाऊंगा.....
सूरज भी बोला जल रहा है मेरा भी तन बदन इस आग में ,
अब मैंने भी रुपहली चांदनी के फव्वारे लगवाऊंगा .....
अब दिन को नहीं थोड़े दिन रातमें निकलने का विचार है ..
पीले कपडे पहनकर उब गया हूँ मैं भी तो मैं गुलाबी जेकेट पहनूंगा .......
अब पेड़ने कहा मैं भी थक गया हूँ कितने सालोंसे खड़ा रहकर ,
मैं भी घुमने रेगिस्तान जाऊँगा और जयपुर भी देखूंगा ....
पत्तोंने तो दहाड़े मारकर रोना शुरू किया ,
हम भी मेघधनुषके जैसे रंगीन कपडे पहनेंगे ....
डाली नीली साडीमें लिपटेंगी और फुल सिर्फ जामुनी ही होंगे ,
पंछियोंने कहा हम अभी पंखोंकी सर्विस कराएँगे ,
थोड़े दिन हम एक जगह पर भी खड़े रह जायेंगे ...
ये घूमते फिरते पेड़ोंके पास हमारा टिफिन मंगवाएंगे ..........
लाल घास पर होगी पिली शबनमकी बुँदे ,
आसमानका रंग होगा गुलाबी और बारिशकी बुँदे भी होगी नारंगी ,
नदी बनेगी सफ़ेद और समुन्दर भी होगा हल्का लाल .....
चलो ये देखकर इंसान क्या सोचेगा ????
अरे कल रात को हम आकाशगंगाके नए ग्रह पर आ गए ,
या जेम्स केमरून की अवतार फिल्मके सेट पर घूम रहे है क्या ????

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