16 जनवरी 2012

देखो मेरे पहलुमें रुका है .....

मेरी खिड़कीसे झांक रही है
वो खामोश नज़र दूर दूर किसीको ,
उसे इंतज़ार नहीं जाने वाले का ...
वो तो बस अलविदा कह जाते है ....
अलविदा न होठों से कहा
न उसकी यादोंमें कोई अश्क बहा
कहने को जो लब्ज़ संभालकर रखे थे ,
वहीँ जमीं पर बिखर गए
मेरे सपनोके सितारे बनकर ...
मेरे घरके आँगनमें
अभी तेरी  यादें  निशान छोड़  रही है ....
मुझे तन्हाई की शिकायत नहीं
उसे तो तुम्हारे साथ भेजा है
तुम्हे नहीं पता
तुम्हारे साथ गुजरा हर लम्हा
देखो मेरे पहलुमें रुका है .....

2 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तन्हाई की शिकायत नहीं
    उसे तो तुम्हारे साथ भेजा है
    तुम्हे नहीं पता
    तुम्हारे साथ गुजरा हर लम्हा
    देखो मेरे पहलुमें रुका है .....
    ...sach sunhari yaaden yun hi nahi jaati...

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  2. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

    उत्तर देंहटाएं

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