6 जनवरी 2012

जा तू अपनी जिंदगी जी ले ......

कल रात जिंदगीको एक ख़त लिखा ...
उसे उसकी खैर खबर पूछी ...कैसी हो ???
जिंदगीने मुझे फोन किया !!!
कहा तुम बिन बिलकुल अकेली ...तनहा ...
तुम कहाँ हो ???
मैंने कहा मैं नए शहरकी नयी सडक पर चल रही हूँ हौले हौले ,
यहाँकी हवाओंकी ठंडक मेरी रूहमें मिसरी घोले ....
नयी गलियां है ,
नए मकान है ,
नए लोग है ,
नया एहसास है ,
पर पुरानी हर बात मेरे साथ साथ है ....
तुम मेरे पते पर आ जाओ ,
थोडा सा बदलाव तुम्हे भी खुश कर देगा ,
हाथ थामकर चलना मेरे संग
तुम्हारे दिलको खुश कर देगा ......
जिंदगीने कहा : नहीं मैं तेरे संग नहीं आउंगी इस बार ....
चाहती हूँ तुम भी अपनी आरजू जी कर देखो ...
क्योंकि मेरी जिम्मेदारी तुम्हे ख़ुशीसे दूर कर देती है ...
हर वक्त जब मैं साथ चली हूँ ...जा तू अपनी जिंदगी जी ले ......

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