19 दिसंबर 2011

चले थे तन्हाईकी ठोस तलाशमें ...

वतनकी गलीसे गुजरना आसान नहीं हुआ कभी
चले थे तन्हाईकी ठोस तलाशमें ,
यादें बस हमारी हमकदम बनकर साथ ही चलती रही ,
लोगोको दिखे हम अकेले चल रहे है .......
कच्ची सड़कें अब कोंक्रिट रोडमें तब्दील हो चुकी थी ,
फ्लाईओवरसे गुजरकर वर्तमान हमारे ऊपरसे गुजरता रहा ....
फिर भी हम जिन्दा ही जिन्दा रहे और न यादें मरी .....
कुछ तलाशथी जिन चेहरोंकी ,
वो नज़र नहीं आये ....
तो ...
कोरी सड़क पर अश्ककी एक बूंदसे एक पाती लिख आई ,
इसी आस में की वो भी जब गुजरे कभी इस सड़क से
उन्हें भी हमारा ये पैगाम मिल जाए ,
किसने कहा हम जुदा हो गए है ,
आज भी तुम्हारी यादोंका गुलशन ताज़ी खुशबू बिखेर रही फिजामें ,
आज भी तुम मेरे साथ खेल रहे हो ...
आज भी तुम मेरे साथ झगड़ पड़े हो ....
आज भी तुमने मुझे आंसू दिए है ,
आज भी उस रुमालसे मैंने उसे पोछा है ....
न जुदा हुए कभी
न कभी जुदा हो पाएंगे ....
हम तुम इसी सड़क पर कभी फिर साथ चलेंगे
इसी आसमें मरते दम तक जी जायेंगे ...... 

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