12 नवंबर 2011

एक ख्वाबोकी चद्दर

तानोबानोंसे बुनी एक ख्वाबोकी चद्दर ,
हर एक दिन एक नए ख्वाबका बोज़ लादे
तकती रही आसमानको रातभर
एक नींदका झोका हो और नींदमें उस ख्वाबका दीदार .........
नींद तो दम ब दम कदम ब कदम दूर सरकती है ,
क्योंकि उस ख्वाबोकी ताबीरके लिए
जागते हुए कुछ कर गुजरना होता है ,
सोते हुए नींदोंमें ख्वाबोसे हुआ नहीं कुछ हासिल कभी ,
नींदों को गंवाकर उन ख्वाबोकी सच्चाई को परखना है ......

1 टिप्पणी:

  1. नींदों को गंवाकर ख्वाबों की सच्चाई को परखना है !
    बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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