20 जुलाई 2011

हवा कुछ बोली ...

एक हवाके झोंकेने आकर कुछ कहा ....

जुबां थी उसकी सर्रर्र सर्रर्र सर्रर्र ..........

बूंदोंने उसके साथ आकर कहा .....

जुबां थी टिप टिप टिप टिप ........

बिजलीने कहा फिर चमक कर

गुर्रर्र गुर्रर्र गुर्रर्र गुर्रर्र ......

मुझे तलाशथी उसने आकर मेरे कानमें कहा .....

मुझे तुमसे प्यार हो गया है ,

क्योंकि मौसम बरसती है मेरे जहनमें तेरा दीदार बनकर ,

तुम जब साथ होती हो तो

भीना भीना एहसास भी है मेरे साथ है यूँ बरसात बनकर ....


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...