16 जुलाई 2011

और मैं .........

कल एक ख़त आया ...एक पुराना दोस्त था ....कई सालसे गुमशुदा था ...ना ना आप गलत सोच रहे थे ...मेरी फ्रेंड लिस्टमें गुमसा था ...मैंने उसे कोई दुःख नहीं पहुँचाया था पर उसे मेरी कोई बात बुरी लग गयी इस लिए वो खुद ही मुझसे दूर चला गया होगा ...आई थिंक सो .......क्या करूँ मेरी मुफलिसीके दिन थे तब वो मेरा गहरा दोस्त था ...पर मेरी किस्मतसे ज्यादा मेरी मेहनतने मेरा साथ दिया और मैं मेरा सपना सच होता देख पाया ....हाँ मैं एक रंगमंच का कलाकार हूँ .....बेहद कामियाब ....अब मेरे नाम के चर्चे नाट्यमंच पर टॉप ब्रेकेटमें होने लगे है ....मैं लोगोसे घिरा रहता हूँ .....मुझे अपने परिवारके लिए वक्त नहीं मिलता पर मैं एक दिन निकाल ही लेता हूँ ....हा मैंने एक दिन एक काम किया ...मेरे लिए जो गैर जरुरी लोग थे उनको खुद से दूर कर दिया ...उन्हें इतनी बुरी तरह से इग्नोर किया की वो लोग खुद इस अपमानसे दुखी होकर खुद ब खुद दूर चले गए ....

ये लोगमें कुछ ऐसे मुफलिस भी थे जो शायद मेरे नजदीक रहे तो मेरी इमेज पर असर होता था .....अब तो मेरा जन्मदिन मेरे घर के लोगोसे ज्यादा मेरे प्रशंसक लोग अति उत्साहसे मनाते थे .....कितने महेंगे तोहफे , कितने सारे गुलदस्ते ...अब तो शहर के बड़े होटल मुझे बतौर मेहमान बुलाने के लिए कतार लगाते थे ....एक बहुत ही आला लाइफ स्टाइल हो चुकी थी ...जीने का मजा आता था ...अब तो मैं फिल्मोके लिए भी बुलाया जाने लगा हूँ ...वो दिन दूर नहीं की हिंदुस्तान के हर छोटे बड़े शहरमें मेरे बड़े बड़े पोस्टर लगे होंगे .....

लेकिन ये ख़त ...ये दोस्त ...लगता है उसे मेरा कोई काम होगा .....इसी लिए लिखा होगा ...चलो एक चेक साइन करके रख दिया ...उसे जितनी जरुरत होगी उतनी रकम भर देंगे सोच कर तैयार कर दिया .........अब लिफाफा खोला ......कैसे हो ??? मैं सिर्फ पॉँच मिनट के लिए तुमसे ...ना नहीं आपसे मिलना चाहता हूँ .....9926247596 इस मोबाइल नंबर पर फोन करके जगह बता देना ...मैं सिर्फ ये शाम के पॉँच बजे तक ही शहरमें हूँ ..............

मैंने नंबर डायल किया ....हेलो ...श्याम ...कैसे हो ???

अच्छा हूँ ...सामने से जवाब आया .....

बोलो क्या काम है ??? मैं तुम्हे शाम रोयल बेंक्वेट होटलके रेस्तोरांमें मिलूँगा ....हाँ फिकर मत करना बिल मैं चूका दूंगा ...आज की शाम का आधा घंटा तुम्हारे नाम .........

शाम पॉँच बजे ...

रोयल बेंक्वेट के बाहर एक मर्सिडीज़ आकर खड़ी हो गयी ....

उसमेसे एक सूट बूटमें सज्ज सज्जन ....साथ में सात साल का बच्चा था .......

थोड़ी देर में एक टोयोटा गाड़ी आई जिसमे से अभिनेता उतरे ....

उसने इधर उधर देखा ...कोई नज़र नहीं आया ...तब होटल का दरवान उसे बुलाने आया ...आप जिसका इंतजार कर रहे है वो अन्दर है ....अपने कपडे और बाल ठीक करके ये जनाब अन्दर गए .....

सामने खड़े श्याम को देखकर ये हक्के बक्के हो गए ...थोडा सा बौखलाकर हाथ मिलाया .....श्यामने उसके हाथ में एक लिफाफा दिया ...और कहा :

यार , मुझे आगे पढना था पर मेरा वक्त बुरा था ...तब तुमने मुझे दस हजार रूपये दिये थे ...उसीकी मददसे मैं आगे पढ़ पाया ...स्पेस रिसर्च के लिए स्कोलरशिप मिली ...अमेरिका के सबसे अच्छे शैक्षणिक sansनासामें काम कर रहा हूँ ......इस साल मुझे अवकाश क्षेत्रमें विशिष्ट संशोधनके लिए नोबेल पुरस्कारसे सम्मानित किया गया ...ये उसका निमंत्रण पत्र है ...और ये लिफाफा है ...उसमे एक ब्लेंक चेक है ....उसमे एक रकम भरकर तुम पहले की तरह उसे मदद करना जो मेरी तरह वक्त का मारा हो ...तुम्हारे हाथमें मिडास टच है ...जिसे छू लेगा वो आस्मां छू लेगा ....


बाय कहकर वो थोडा आगे गया ... बेटे को गाडी में बिठाया ...पर फिर कुछ याद आया हो वैसे श्याम फिर इस जनाब के पास लौट कर आये और एक तस्वीर उसे दिखाकर बोले और हां ये मेरी धर्म पत्नी है ......आत्महत्या करने जा रही थी ...क्योंकि ये बिनब्याही माँ बननेवाली थी ...उसने तुम्हारा नाम बताया ...उसे ये नहीं पता था की तुम मेरे दोस्त हो ....पर मैंने उससे शादी कर ली ...ये बेटा तेरा ही ही जिसे मैंने अपना नाम दिया ......

बाय कहकर वो श्याम चला गया ........

और मैं .........

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