13 जुलाई 2011

एहसासकी चुनर पर

आज एहसासकी चुनर पर झख्मोके दाग मिटा दीजिये ......

नया सर्फ़ एक्सेल तो इस्तमाल कीजिये .....

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कोई तुम्हारे नयनोमें झाँखने की कोशिश कर रहा है ,

हमारे रे बेन के सन ग्लास तो इस्तमाल कीजिये .....

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तुम्हारे दिल को चलो आज बहलाते है ,

पिज़ा हट में जाकर मोहनलाल की चाय पिलाते है ......

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तुम्हारे गुस्सेकी लाली कुछ ऐसे हश्र कर गयी ,

मेरे हाथमे न जाने कब ९०० एम् एल की आइस क्रीम खाली हो गयी ....

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क्यों तडपाते हो हमें इस कदर सुबह सुबह ,

प्रॉब्लम का सोल्यूशन तो एक ही है वो है कायम चूर्ण .............

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