2 जुलाई 2011

वाह क्या बकवास कविता है !!!!!!

एक खोया खोया सा चाँद
कल मेरे आँगनमें उतरा .....
कल अमावस थी
तो उसकी ऑफिसमें छुट्टी थी ....
कहा उसने कितने खुशनसीब है इंसान !!
उसे एक हफ्तेमें शनि रवि वीक एंड मिलता है .....
यहाँ तो बारह घंटे उनतीस दिन
नाईट शिफ्टमें काम करना पड़ता है .......
रातके अँधेरे में कुछ उल्लू ,कुछ चमगादड़ ,
कुछ जुगनू नज़र आते है ....
रातके फैले काजलमें तो सभी जीव सो जाते है ....
उब गया हूँ मैं भी अब यूँही रात अकेले अकेले घूमते ,
सितारे भी थक गए है अब तो वो भी टूट जाते है एक एक करके .....
चलो आज तुम मेरे साथ कुछ तो बतिया लो ,
मेरे कुछ गम को सुनो और कुछ ख़ुशी देकर जाओ ......
मैंने उसे डी वी डी पर गोलमाल सिरीज़ की चार फिल्मे दिखाई ,
तीन बड़े मग चाय पिलाई ,
और थोड़ी पकोड़ी भी खिलाई .....
खाकर खुश होता चाँद सुबह होते चला गया ,
फिर अगली अमावस आने का फिर वादा कर गया ......

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