आज मैंने देखी बंद आँखोंसे एक दुनिया ,
ना कोई रंग था ,ना कोई आकार था ,
बस एक पहचान आवाज की थी ,
एक पहचान स्पर्श की थी .....
कुछ गहरे एहसास होते है
जो आँखोंसे देखे नहीं जा सकते ,
पर स्पर्श बोल देता है बिना कोई शोर किये .....
उसकी गहराई तो ये है ,
बाहरी सुन्दरतासे नावाकिफ होते है ये ,
पर इस आकारसे इंसानकी उंचाई पता चल जाती है .....
याद रह गयी जो मैंने देखी बंद आँखोंसे दुनिया ,
उसे देखना नहीं महसूस करना ही गवारा हुआ ......
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
4 जुलाई 2011
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