26 जून 2011

लम्हा लम्हा ..तन्हा तनहा ...

कैसी होती है तनहाई ये अब हमें मालूम हुआ ,
सच होता है कडवा कितना ये अब हमें मालूम हुआ ,
कहीं कोई नाराज़ हो ना जाए ये सोचकर सच बोल ना पाए थे ,
सच बोलने का अंजाम इतना तनहा कर देगा ये अब हमें मालूम हुआ ...........
कहीं कोई राह पर गुजरते हुए कल तक थे जो हमसफ़र ,
कांटेकी पगडण्डी पर आकर साथ छुटा जब तब हमें मालूम हुआ ,
दुनिया तो साथ देगी तब तक जब तक राहें फूलोंकी बनी है ,
कांटे पर चलना पड़ेगा अकेले ही ये अब हमें मालूम हुआ .............
वो गैर होते तो कोई शिकवा भी नहीं करते होठोंसे हम ,
ये घाव जब अपनोंसे मिले तो दिलका टूटना क्या होता है ???
सच बोलने का अंजाम सिर्फ आंसू ही क्यों होता है ?
अब खुले आकाशमें फरमाई ये कैद की सजा है ये अब हमें मालूम हुआ .........

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