कैसी होती है तनहाई ये अब हमें मालूम हुआ ,
सच होता है कडवा कितना ये अब हमें मालूम हुआ ,
कहीं कोई नाराज़ हो ना जाए ये सोचकर सच बोल ना पाए थे ,
सच बोलने का अंजाम इतना तनहा कर देगा ये अब हमें मालूम हुआ ...........
कहीं कोई राह पर गुजरते हुए कल तक थे जो हमसफ़र ,
कांटेकी पगडण्डी पर आकर साथ छुटा जब तब हमें मालूम हुआ ,
दुनिया तो साथ देगी तब तक जब तक राहें फूलोंकी बनी है ,
कांटे पर चलना पड़ेगा अकेले ही ये अब हमें मालूम हुआ .............
वो गैर होते तो कोई शिकवा भी नहीं करते होठोंसे हम ,
ये घाव जब अपनोंसे मिले तो दिलका टूटना क्या होता है ???
सच बोलने का अंजाम सिर्फ आंसू ही क्यों होता है ?
अब खुले आकाशमें फरमाई ये कैद की सजा है ये अब हमें मालूम हुआ .........
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
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