18 मार्च 2011

आज उसका इंतज़ार है ....

आज कुछ बोलने का मूड नहीं ,
बात के लिए भी जज्बात चाहिए ,
एक अदद आवाज़ चाहिए ,
उसे सजाने के लिए अल्फाज़ चाहिए ...
कल रात चाँद रो रहा था ...
उसके साथ सितारे भी सिसक रहे थे ....
उनसे रात का जाम टूट गया था ....
टूटे हुए टुकड़े बिखरे थे रातको मेरी छत पर ...
चुभ रहे थे वो मेरे नंगे पाँव को ....
शबनम बरसाकर चाँदने हर झख्म भर दिया ....
शुक्रिया कह दूँ उससे पहले चाँद सितारों के साथ भाग गया ....
आज रात का इंतज़ार है ...
चाँद तेरे मासूम चेहरे को चूम लेना है एक बार फिर ...
बात करनी है आज चाँदसे ,रात को ,खुले आसमांमें ,खुली छतमें ....

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  2. बहुत खूब,यों भी आज सुपर मून है , यों तो दक्षिण में होली का ख़ास महत्व नहीं फिर भी आपको होली की हार्दिक शुभकामनाये !

    उत्तर देंहटाएं

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