13 अगस्त 2010

घाव

अय दिल देख वो तेरा दोस्त हमेशाके लिए जा रहा है
तुमसे दूर बहुत दूर....
कितने पत्थर दिल हो तुम ?
तुम तो ऐसे ना थे !!!!!
क्या कहूँ इन मासूमोंसे ....
देखो ये घाव मेरे सर पर ....
पट्टी रंगी हुई है लाल रंग से ....खून से .....
मैंने भी उस पत्थर दिल से टकरा टकरा कर इल्तजा की थी
रुक जा ...रुक जा .......
वो लौट आया ...वापस आया .......
सर का घाव याद दिलाता रहा उसकी चोट ....
घाव ना भर पाया ...

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