27 जून 2009

अय बरखा ...

तेरी राह तक रहे है अय बरखा ,

प्यासी है जिंदगी बस दो बूंद हम पर बरसा जा ......

तेरी शबनमी बूंदों से जलते अरमान सी धरती

कुछ पल के लिए भीग जायेगी

फ़िर अपना सीना चिर कर फसलों को लहलहाएगी ....

आँख मिचौली खेलना तेरी आदत ही सही

अभी छुप गए हो पर पकड़े तो जाओगे ही ....

हमारी याद में अक्सर तुम भी आंसू बहाओगे ही ....

थोडी तड़प ,थोडी सी प्यास और दो घड़ी बढ़ा जाओ ,

पर ये आस या साँस टूट जाए

उससे पहले तो तुम आ ही जाओ ........

3 टिप्‍पणियां:

  1. पर ये आस या साँस टूट जाए
    उससे पहले तो तुम आ ही जाओ ........
    समय के अनुकूल.
    सच्ची पुकार।

    उत्तर देंहटाएं
  2. कैसे भी करके अब तो बुला ही लिया जाये

    उत्तर देंहटाएं
  3. AAJ YE JAMI PAYASI HAIN
    THAKI AANKHON SE TERA INTZAR HAIN
    AIA BARAKHA AAB TO BARAS JAO
    AISE BARSO KI JAMI KI PYAS BHUJA JAYE

    RAJ

    उत्तर देंहटाएं

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