17 जून 2009

बातें आज संगीतकी ....

आज बात करें कुछ संगीत की !! एक नन्हा सा बच्चा जब इस दुनिया में आता है तो उसके रुदन के साथ ही शुरू होता ही संगीत का पहला सफर ॥

चिडियों का चहचहाना, झरने का कलकल करके बहना,कोयल का कुकना ,बारिश की बूंदों का छमछम करके जमीं पर कूदना, कहीं पर भी देखो संगीत के सुर प्रकृति भी हमेशा से बहाती रही है । दुनिया के किसीभी देश में जाओ वहां की प्रजा का एक संगीत का अपना रूप ही पाते ही .नृत्य भी संगीत के साथ अभिन्न रूप से जुदा हुआ पाया जाता ही .चाहे वह पूरब का देश हो या पश्चिम का !!!

अगर हम बात करते ही हमारे भारत देश की तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर राज्य की पहचान अपना अलग नृत्य और संगीत ही ।हर राज्य का अपना लोक संगीत ही अपनी भाषा और बोली के अनुसार ...नृत्य भी संगीत के बिना बिल्कुल अधूरा पाया जाता है. पंजाब का भांगडा-गिद्दा नृत्य लीजिये ,या आसाम का बिहू नृत्य ,गुजरात का गरबा लीजिये या केरल का कथकली हरेक की अपनी पहचान है .पश्चिम बंगाल की पहचान है उसका रविन्द्र संगीत !!! भारतीय संगीत के मुख्य दो प्रवाह : शास्त्रीय और सुगम संगीत .सुगम संगीत ज्यादा लोकप्रिय और धारा प्रवाह से जुडा पाया जाता है .उसमे फिल्मी संगीत मुख्य है .उसके रीमिक्स गाने ,नॉन फिल्मी प्राइवेट अल्बम ,गझल ,भांगडा ,और न जाने क्या क्या !!!! शास्त्रीय संगीत जुडा है मुख्यतः वाद्य संगीत और गायकी से .गायकी में अनगिनत दिन के हर प्रहर के अनुरूप राग गए जाते है .बंदिशे है ...सूर है ...ताल है ....त्रिताल है ....गायकी में भी ठुमरी ,दादरा और ना जाने क्या क्या !!!! वाद्य संगीत में भी कई वाद्य देख सकते है :सितार ,तबला ,शहनाई ,सारंगी ,वीणा,संतूर ,सरोद ,वायोलिन ,बांसूरी ,.... सूर होते है सिर्फ़ सात ही :सा ,रे ,ग,म, प, ध ,नि ....पर एक बहुत ही अनोखी और कर्णप्रिय दुनिया का सफर है ये संगीत ...

गिटार ,ड्रम,बोंगो ,कोंगो ,इलैक्ट्रिक गिटार ,सेक्सोफोन,कैसियोसे जुडा है आधुनिक संगीत और अब तो कम्प्यूटर की मदद से आप चाहे वह कर सकते है ।आजकी नई पीढ़ी ने तो इन दोनों को मिला कर फ्यूजन संगीत का आविष्कार किया है . गायकी में देखो तो कितने प्रकार है !! गीत ,गझल ,पद,छंद ,दोहे ,श्लोक ,प्रार्थना ,भजन ,स्तुति ,कीर्तन ,काफ़ी ,!!! गायकों में देखिये : पंडित जसराज ,पंडित ओमकारनाथ ठाकुर ,पंडित शिवकुमार शर्मा ,पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ,उस्ताद जाकिर हुसेन ,उस्ताद अमजद अली खान ,पंडित रविशंकर , उस्ताद बिस्मिल्ला खान ,जैसे दिग्गज नाम जुड़े हुए है ... अकबर के दरबार के तानसेन , गुजरात के तानारिरी ,बैजू बावरा ,तुलसीदास ,सूरदास ,भक्त कवि मीरा बाई संगीत से जुड़ी अमर दंतकथा है ......

अब बात करते है कुछ फ़िल्म संगीत की भी ।द्वंद्व रहा है हमेशा पुरानी और नई फिल्मों के संगीत के बीच॥नई पीढ़ी के बाशिंदे भी पुरानी फिल्मों के संगीत की कर्ण प्रियता और लोकप्रियता का सहजता से स्वीकार कर लेते है पर पुरानी पीढ़ी अभी तक प्रवर्तमान संगीत को अपना नहीं पाती है . गायकों की बात करें तो के एल सायगल,नूरजहाँ ,सुरैया ,सुरेन्द्र ,शमशाद बेगम ,बेगम अख्तर ,मोहम्मद रफी ,मुकेश ,किशोरकुमार ,महेंद्र कपूर ,मन्ना डे,से लेकर सोनुनिगम , के .के .,शान ,अदनान सामी ,श्रेया घोषाल ,कविता कृष्णमूर्ति , और अभी तक जो सदा बाहर है उन महान गायिका लता मंगेशकरजी ,और आशा भोसले ...ये लिस्ट में अभी अनेक नाम छुट रहे है जो में महसूस कर रही हूँ .टी. वी पर आने वाले रियालिटी शो के जरिये कितने ही नए उभरते गायकों की संख्या बढ़ रही है .....

संगीतकारोंको लें तो नौशाद ,एस ।डी .बर्मन ,पंचम दा ,लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ,कल्याणजी आनंदजी ,खय्याम ,रविन्द्र जैन ,सी रामचंद्र ,से लेकर आज के ऐ आर रहेमान तक के महान संगीत कर मौजूद है ...

आनंद बक्षी ,योगेश ,कैफी आज़मी से लेकर आज के प्रसून जोशी तक के नमी अनामी शायरों के सुंदर अल्फाजों को बंदिश में बांधा जा चुका है ॥मेरे प्रिय गीतकार तो है गुलज़ार जी ....

बेजोड़ तवारीख रही है ये हिन्दी फ़िल्म और गैर फिल्मी गीतों के सफर की ... लोक संगीत से रीमिक्स तक का फ्यूजन संगीत तक का ये सुरीला सफर है जिसके कई मुकाम तो है पर मंजिल कभी नहीं हो सकती .....इस संगीत ने हमें हमेशा तनावमुक्त रखा है ।

दो पीढियों के बीच के फासले अगर कम करने हो तो संगीत एक अक्सीर इलाज है । थोड़ा थिरक लीजिये आज के इस गाने पर भी : ये इश्क हाय बैठे बिठाये जन्नत दिखाए हो .... अपना पुराना जवानी का युग याद आ जाएगा .

अगर मैं कुछ अपनी बात कहूँ तो ट्रांजिस्टर से हेड फोन तक के उपकरण ने मुझे बचपन से आज तक संगीत से जोड़े रखा है .मैं हर दौर में बजने वाला वर्तमान संगीत ही सुनना पसंद करती हूँ .आज का ही भरपूर मजा लेती हूँ ..कल का संगीत पसंद है तो आज के गाने भी बड़े ही चाव से सुनती हूँ .मोबाइल के हेड फोन और कार के रेडियो तक ऍफ़ एम् संगीत की आज बोल बाला है .रेडियो आज का लेटेस्ट ट्रेंड है . प्राइवेट ऍफ़ एम् रेडियो का आकाशवाणी से जब्बर मुकाबला है .पर जित तो आखिरकार संगीत की ही है ... इतना लिखने के बाद भी ये लेख अधूरा सा ही लगता है क्योंकि अभी इसमें कई बातें छूटी हो सकती है ...
मेरे कुछ पसंदीदा आज के गाने ::

१.तोसे नैना लगे पिया सांवरे ...
२.जुदा होके भी तू मुझमें कहीं बाकी है ...
३.मौला मेरे मौला मेरे ...
४.आंखों में सपने लिए ...
५.गुमसुम हो क्यों ??
६.किसका है ये तुमको इन्तजार मैं हूँ ना ....
७।मैं जहाँ रहूँ मैं कहीं भी हूँ तेरी याद साथ है ....

८रहना तू है जैसा तू थोड़ा सा दर्द तू थोड़ा सुकून ....

सफर ये सुरीला संगीतका कभी ख़त्म न हो पाये ,

ये इश्क सूर का मुझमे मेरी साँस हो....

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