24 अप्रैल 2009

आज पुराने घर फ़िर से जाना हुआ .....

पुरानी यादोंकी गलीसे गुजरे हम आज अचानक ,
वही गली वही नुक्कड़ वही पेड़ घने से ,
बिखरे थे कुछ पत्ते सूखे जमीं पर
मेरे क़दमोंके निशां यादों में सहेजकर ..........

झाँका खिड़कीसे अन्दर घरके ,
कुछ नजर नहीं आया मगर ,
जिन्दा पाया बचपनकी हर याद को
और नैनोंमें नीर भर आया ,

वो सावन के झूले ,वो पानीमें दौड़ लगाना ,
नोट बुक के पन्ने फाड़कर कागजकी नाव तैराना ,
बाहर तेज़ धुप थी बैसाखकी ,
पर मन भीग रहा था ,आँखे रो रही थी जैसे बरसे सावन .......

9 टिप्‍पणियां:

  1. preshan kar diya beete hue lamho ki yaado ne...badhi muddat se loute jo diwaane ghar apne..

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  2. bachpan ki sunahari yaadein bahut sunder tarike se saheji hai,bahut khub.

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  3. purane ghar ke saath judee yaadein anmol hotee hain hamaare saath baantne ke liye shukriyaa......

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  4. यादें बचपन की भली सबको होती प्रीति।
    बचपन फिर लौटे नहीं यही जगत की रीति।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं

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