7 फ़रवरी 2009

तुजे मेरी उम्र दराज हो ......




न साज है न श्रृंगार बस है तो एक सीधी सी बात ..


हर रात तेरी नन्ही सी आँखे देखे जो ख्वाब ,

सूरजकी पहली किरण आए दबे पाँव ,

और तेरे ख्वाब पुरे करती जाए .....

सर्दीकी धूपसा हो नर्म नर्म तेरा असर ,

बारिशकी बूंदों जैसी बरसे तेरी हँसी छम छमा छम ,

कड़ी धूप बैसाखकी भी भली सी लागे ,

तेरे कानोमें वो कोयलकी कुक ही सुनाये ............
और क्या मांगू मेरे रबसे यारा ?

बस तुझे मेरी उम्र लग जाए ...........
जाते जाते मेरा आज का ख्याल :

मेरे ख़यालका तुम ख़याल कर लेते हो ...

मेरी निगाहों के सवालको भी पढ़ लेते हो ...

मेरी कुछ अनकही भी सुन लेते हो .....

वाह ! और क्या कहूँ तुम तो कमाल कर लेते हो ........

4 टिप्‍पणियां:

  1. सूरजकी पहली किरण आए दबे पाँव ,

    और तेरे ख्वाब पुरे करती जाए .....

    बढिया.. उत्तम

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  2. मेरी कुछ अनकही भी सुन लेते हो .....

    वाह ! और क्या कहूँ तुम तो कमाल कर लेते हो ........
    बहुत अच्‍छी रचना....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।
    बहुत सुन्दर लिखा है-

    मेरे ख़यालका तुम ख़याल कर लेते हो ...
    मेरी निगाहों के सवालको भी पढ़ लेते हो ...
    मेरी कुछ अनकही भी सुन लेते हो .....
    वाह ! और क्या कहूँ तुम तो कमाल कर लेते हो .......

    उत्तर देंहटाएं

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