24 जनवरी 2009

आसमांमें देखो बाहर ......



आसमांमें देखो बाहर जाने कितने
तुम्हें बिखरे लब्ज़ नजर आयेंगे ,
उतार लो उसे दिलकी आंखोंसे पढ़कर कोरे कागज़ पर
तो ये नज़्म नजर आयेंगे ....
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बिखराती लहराती ये झुल्फोंको समेट लो जरा ,
घडीभरके लिए फलक हमें जरा ये चाँद तो नज़र आए ....
इस जमींको इस आसमांको रोशन कर दो नजरें उठाकर ,
तो आपकी आंखों के खुबसूरत सपने भी हमें नजर आयेंगे .......
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दर्द तो बिकता है यहाँ हर गली हर मोड़ पर ,
खुशियोंकी फुहारें तो बहुत ही कम को नसीब होती है ,
अपने होठोंकी मुस्कुराहटोंको बांटते रहो हरदम ,
हर निगाहोंको जो नम होती है ......

3 टिप्पणियाँ:

  1. आसमांमें देखो बाहर जाने कितने
    तुम्हें बिखरे लब्ज़ नजर आयेंगे ,
    उतार लो उसे दिलकी आंखोंसे पढ़कर कोरे कागज़ पर
    तो ये नज़्म नजर आयेंगे ....

    बहुत ही बढ़िया

    www.merichopal.blogspot.com

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं