13 जनवरी 2009

उत्तरायण का पर्व ....



मैं कागज़का टुकडा .....
सब मुझे कहे पतंग ॥!!
मेरे हजारों साथी
कोई लाल ,कोई हरा ,कोई पिला बस सभी रंगीन ...!!!


डोर हमारी बनती है दोस्त ,
वो दोस्तको पतली डंडीके संग बांधकर
मैं और डोर आकाशमें उड़ने जाते है .....
वहां पर हमारे न जाने कितने ही साथी-दोस्त मिल जाते है ....
कोई प्यारसे गले लगाते है ,
तो कोई हमसे अपना दामन छुडाता है ......


हमको हवामे उड़ना भा जाता है ,
तब कोई एक पतंग आकर चुपके से ,
हमें जमीं से अलग कर जाता है ,
कटी हुई पतंग बनाकर हवामें लहरा जाता है .....


एक छोटेसे बच्चे की आसभरी नजरमे
और उसके हाथ पर जाकर उसकी मुस्कान बन जाता हूँ ...........!!!!!
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सभी पाठकों को उत्तरायण पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

    ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    उत्तर देंहटाएं
  2. aapko bhi bahut bahut subhkaamnaayen....

    bahut acchi kavita hai...

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपको भी उत्तरायण पर्व की हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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