11 दिसंबर 2008

गुजरा हुआ लम्हा वक्तका ......

ये वक्त तो रेतकी तरह है,रफ्तार लिये है अपनी,
एक पल ऐसा आता है, जैसे कोई हमें बुलाता है,
ये वक्तका ही तकाजा है, पल भर के लिये सही
उस वक्त होता नहीं वक्त हमारे पास है.....

वो चेहरा अनकही खामोशी लिये,
एक बार फिर दुनियाकी भीडमें खो जाता है...
जब फुरसद के लम्होंमें उस चेहरेकी याद आती है,
दिल उसे तब मिलना भी चाहता है.....

खबर आती है उस वक्त बहती हवाओंके साथ,
जो पल वो रुबरु हुआ था आपसे,
आपसे आखरी बार अलविदा कहने आया था,
तुम्हारी यादोंके साथ दुआएं देकर रुखसत कर गया था......

अब चाहे कितने ही आंसू बहालो,
कितना भी दिलसे पुकारलो,
वो गुजरा हुआ लम्हा था वक्तका,
तुम्हारे चाहने पर भी लौटकर वापस न आयेगा.......

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