6 दिसंबर 2008

अकेले है पर तनहा नहीं ..!!


आज तन्हाईमें बस यूँ ही वक्त गुजारना था ,

चाहते थे न कोई आस पास हो ....

तुम्हारे साथ बात करनी थी यूँ ही अकेले में ,बस मैं हूँ और मेरी तनहाई हो ....

फ़िर भी तुम्हारी वह यादें हमें घेरने आ गई ,

तुम कहीं भी पास न थे मेरे ,

फ़िर भी एक अश्क का बूंद आंखों को दे गई ,

यूँ तुम्हारे खयालने हमें रहने न दिया था तनहा .......

तुम हो और हम है ,

बिल्कुल यूँ आमने सामने ही ,

थोडेसे खोयेसे थोड़े से खयालोंमें ,

अब दोनों ही अकेले है पर तनहा नहीं ..

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