29 दिसंबर 2008

दास्ताने मोहब्बत .....!!!!



एक अनाम शायर की कलम को मैंने यूं कहते हुए पाया :

सूरजने चाँद से जरूर मोहब्बत की होगी ,तभी चाँद पर दाग है ,

चाँदने की होगी बेवफाई ,इसी लिए सूरज में इतनी आग है .....


मैंने कुछ ऐसे ही लिखा चाँद की वकालत करते हुए :


चाँद को यूं बेवफा मत समजिये......

चाँद तो तैयार था पूरा पिघल जाने को सूरजकी झुलसा देती आगमें,

पर चाँद का यूं झुलस जाना सूरजको गंवारा न हुआ ,

तभी एक रात सूरज चुपचाप वहांसे रवाना हुआ ........

आज तक हमने चाँदको रातमें करवटें बदलकर ,

सूरजका इंतजार करते हुए देखा है ....

पूर्णमासीकी पूरी रात चाँद सोता नहीं ,

थका हुआ चाँद अमावस को आता ही नहीं ....


हमने चाँद के आंसूओ को देखा है ,

सितारे बनकर आसमान पर चमकते हुए रातों में ....

हम रहे या ना रहे ...

चाँद सूरज की ये दास्ताने मोहब्बत तो अमर है .....

1 टिप्पणी:

  1. bahut sahi farmaya,hamare chand ko suraj ne bewafa ka rutba diya hai,chand to aaj tak wafa nibha raha hai,aur suraj jaal raha hai pachtawe mein,aaj bahut sundar ehsaas hai kavita ke,badhai.

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