वो हमें राहों पर छोड़ गया तनहा ,
इंतजार करते हुए ...
सोचा था हम उसकी जरूरत है ,
उसके लिए जन्मों तक इंतज़ार करते रहेंगे .....
पर हर इब्तदा लेकर आती है एक इन्तेहा,
इससे वो नावाकिफ था ,
कदम रुक जाए ये होता है कभी कभी ,
ये नहीं मुमकिन की जिंदगी का वक्त रुक जाए .......
और हम लौट गए कहीं अनजान दुनिया में ,
जहाँ हमारे वजूद के निशाँ ना रह गए बाकी ,
अब गर लौट कर आये तो भी ,
यादों के धुंधले निशाँ को छोड़ कुछ ना मिलेगा ......
जिंदगी मेरे लिए ख्वाबोंके बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!
आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पायी ...
-
आज के ज़माने में हम जिस रफ्तारसे जिंदगी में भाग रहे है उसमें बस एक ही चीज का अभाव हमें खाए जा रहा है और वह है फुरसत ...!!!!ढूंढो सुबह से शाम ...
-
अब हम जा रहे है अपने इस भ्रमणके तीसरे पड़ाव की ओर .... जैसे की आपसे मैंने पहले भी बताया था की मेरी सबसे पसंदीदा जगह है ऋषिकेश हरिद्वारसे तकर...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें